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गुरु की महिमा

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गुरु की महिमा

गुरु की महिमा

गुरु की महिमा

गुरु की महिमा

जो बनाए हमें इंसान
जीवन में दे सही गलत की पहचान
महान गुरुओं को शत -शत नमन ।।

‘गुरु’ शब्द में ‘गु’ का अर्थ है ‘अंधकार’ और ‘रु’ का अर्थ है ‘प्रकाश’ अर्थात् गुरु का अर्थ हुआ अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला मार्गदर्शक।

‘गुरु’ दो प्रकार के होते हैं एक आध्यात्मिक(धार्मिक) और एक शिक्षक। ये दोनों ही हमें ज्ञान की ओर ले जाते हैं। आध्यात्मिक गुरु हमारी अंतर आत्मा की शुद्धि करते हैं और शिक्षक हमें ज्ञान की ओर ले जाते हैं। सही शिक्षक वही हैं जो बच्चे की योग्यता को पहचाने और उनको इस ओर बढ़ावा दें। हमारे शिक्षक हमें शैक्षणिक दृष्टि से तो बेहतर बनाते ही हैं साथ ही वह हमारे पथप्रदर्शक भी हैं । जीवन में अच्छा करने के लिए वे हमें हर असंभव कार्य को संभव करने की प्रेरणा देते हैं ।

हर वर्ष हम 5 सितंबर को हमारे महान शिक्षकों को सम्मान देने के लिए शिक्षक दिवस मनाते हैं। यह दिन एक विद्यार्थी तथा शिक्षक के लिए बहुत ख़ास है । गुरु शिष्य की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है , इस संसार में जिसने जन्म लिया उसने अपने जीवन में गुरु धारण किया जैसे कि भगवान कृष्ण , भगवान राम इत्यादि। गुरु और शिक्षक का रिश्ता अटूट है ।

हमारे माँ – बाप हमारे सबसे पहले गुरु हैं, जो हमें जन्म देने के साथ अच्छी शिक्षा तथा पालन पोषण देते हैं। शिक्षक हमें ज्ञान की और ले जाते हैं, वे हमें जिंदगी को एक नए तथा सही ढंग से जीना सिखाते हैं। वे हमारे भविष्य को उज्ज्वल बनाते हैं। हमारा जीवन शिक्षा के बिना अधूरा है। शिक्षा हमारी जिंदगी में ऑक्सीजन का कार्य करती है जैसे एक व्यक्ति को जीने के लिए ऑक्सीजन की ज़रूरत है, वैसे ही हम सबको शिक्षा की आवश्यकता है । यह कार्य एक बुद्धिमान और सुशिक्षित शिक्षक ही कर सकता है। एक सच्चा शिक्षक जानता है कि हर विद्यार्थी में अपार क्षमता है । वह विद्यार्थी के अंदर छुपी क्षमता को पहचान कर उसकी कला को निखारता है। हमें अपने शिक्षकों का सम्मान करना चाहिए ।

Written By:- Ms. Shivani Hingle, Teacher, Primary Wing, MRIS Charmwood