तुम साथ थे

बचपन में कँचे चटकाते,
हथेली पर लट्टू नचवाते,
कन्नी दे दे पतंग उड़ाते,
गुल्ली डंडा ख़ूब खिलाते,
लकड़ी का बल्ला बनवाते,
तुम साथ थे|

स्कूल बस में संग ठहाके,
सुबह सवेरे झूला झुलाते,
कैंटीन से आते जाते,
ब्रेड पकौड़ा, समोसा लाते,
कम्पट, जेम्स, चाकलेट खाते,
तुम साथ थे|

पढ़ने में होती कठिनाई,
आसानी से सब समझाते,
जेब में जब होते न पैसे,
किताब हमारी,तब बन जाते,
बुरे वक़्त हौसला बढ़ाते,
तुम साथ थे|

लैंडलाइन पर फ़ोन मिलाते,
घंटों घंटों थे बतियाते,
स्वास्थ्य ख़राब सूचना पाते,
झट से घर मिलने आ जाते,
बुखार में भी क़िस्से सुलगाते,
तुम साथ थे|

आधी रात नतीजा आता,
सभी दौड़ देखने जाते,
सज़ा साथ गाल पर पाते,
ईनाम पा तालियाँ बजाते,
ख़ुशी ग़म सभी बँट जाते,
तुम साथ थे|

कालेज के नए रंग दिखाते,
नए लक्ष्य संधान कराते,
जीवन से परिचय करवाते,
असमंजस में पार लगाते,
दुनियादारी भूल थे जाते,
तुम साथ थे|

लक्ष्यों को फिर धूल चटाते,
सफलता अर्जित, नौकरी पाते,
उत्सव और आनंद मनाते,
मोटरसाइकिल कार चलाते,
बहुत दूर थे चलते जाते,
तुम साथ थे|

बढ़ा परिवार घट गए नाते,
स्मार्टफ़ोन मित्रता खाते,
लैंडलाइन अब नहीं आते,
मैसेज हैं हालचाल बताते,
बीते वक़्त की याद दिलाते,
तुम साथ थे|

जीवन,जीवन हो पाया मित्र,
क्योंकि तुम साथ थे !
मेरे सभी प्रिय, परम आदरणीय
मित्रों को समर्पित!

Written by:- Ms Gunjan Sharma is Headmistress, Early Years, at MRIS Charmwood.

2019-08-06T15:10:36+05:30August 6th, 2019|Blog|